حیدریون@heydaryioon

कठिनाइयों और कठिनाइयों के बोझ से हम झुकते नहीं। हम इतिहास के शाश्वत शिखर बने रहेंगे। हम केवल तभी खड़े नहीं होते जब या तो हम मारे जाते हैं, या घायल होकर जमीन पर गिर जाते हैं, अन्यथा कोई ताकत हमारी पीठ नहीं झुका सकती। शाहिद बेहश्ती

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