raihanatalnasr@raihanatalnasr

मेरी कलम से स्याही की एक बूंद गिरी और एक फूल उग आया। शायद वह स्याही नहीं थी, बल्कि मेरी आत्मा वर्णमाला के अक्षर बोल रही थी।

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